तिल की फसल की देखभाल तिल की पत्तियां, जब पीली होकर गिरने लगें तथा पत्तियां हरा रंग लिए हुए पीली हो जाएं, तब समझना चाहिए कि फसल पककर तैयार हो गयी है। इस समय फसल की कटाई कर लेनी चाहिए। देरी से कटाई करने पर फलियों के चटकने से बहुत अधिक नुकसान होता है। कटाई, संपूरण पौधे सहित नीचे से करनी चाहिए। कटाई के बाद बंडल बनाकर खेत अथवा खलिहान में ही जगह-जगह पर छोटे-छोटे ढेर में खड़े कर देने चाहिए। जब अच्छी तरह से पौधा सूख जाएं, तब डंडे छड़ आदि की सहायता से पौधों को पीटकर या हल्का झाड़कर बीज निकाल लेने चाहिए। उसके बाद दानों को अच्छी तरह साफ करने के बाद धूप में सुखाएं। दाने में नमी की मात्रा लगभग 8-10 प्रतिशत हो तब भंडारपात्रों/भंडारगृहों में भंडारित करें। उन्नत तकनीक अपनाते हुए एवं उचित वर्षा होने पर असिंचित अवस्था में उगायी गयी फसल से 4-5 क्विंटल तथा सिंचित अवस्था में 6-8 क्विंटल/ हैक्टर तक उपज प्राप्त होती है। साेयाबीन की फसल की देखभाल सोयाबीन फसल में जब पत्तियों का रंग पीला पड़ जाये और पत्तियां सूखकर गिरनी प्रारंभ हो जायें, इस अवस्था पर फसल की कटाई कर लेनी चाहिए। फसल कटाई के बाद सूखने के लिए फसल को चार-पांच दिनों तक खेत में सुखाने के बाद बैलों की सो सहायता से दाना अलग कर लें। दानों को तब तक सुखाना चाहिए, जब तक 13-14 प्रतिशत तक नमी रह जाये। उपरोक्त विधि से सोयाबीन की खेती करने पर 16 क्विंटल सोयाबीन दाना तथा 25 क्विंटल सूखा भूसा हमारे कृषक साधारण ढंग से प्राप्त कर सकते हैं। अरंडी की फसल की देखभाल अरंडी की फसल में जब सिट्टे हल्के पीले या भूरे हो जाएं तब कटाई करें। सिट्टों के पूरा पकने तक का इंतजार नहीं करें, अन्यथा उत्पाद के चटकने से पैदावार में हानि होगी। अरंडी में पहली तुड़ाई लगभग 90 से 120 दिनों बाद और बाद में हर माह आवश्यकतानुसार तुड़ाई करते रहें। पके सिट्टों को काटने के बाद कुछ दिनों के लिए धूप में सुखाएं। गहाई के लिए सिट्टों की डंडे से पिटाई करें या सिट्टों के ऊपर बैल या ट्रैक्टर से दाय चलाकर बीज अलग कर लेना चाहिए मड़ाई करके तेज हवा में ओसाई करके बीज अलग कर लेना चाहिए। उपरोक्त अच्छी कृषि तकनीक अपनाकर असिंचित अवस्था में 15 से 23 क्विंटल/हैक्टर और सिंचित अवस्था में 30 से 35 क्विंटल प्रति हैक्टर पैदावार प्राप्त की जा सकती है। मूंगफली मूंगफली में फलियां बनते समय खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए अन्यथा फलियों की वृद्धि की अवस्था पर सिंचाई करें। अधिक उपज और तेल की मात्रा प्राप्त करने के लिए फसल की उचित समय पर खुदाई करना लाभदायक है। अधपकी फसल की खुदाई पर उपज एवं तेल के गुणों में कमी आ जाती है। मूंगफली के पौधों में फूल एक साथ न आकर धीरे-धीरे बहुत समय तक आते हैं। गुच्छेदार प्रजातियों में दो महीने तक व फैलने वाली प्रजातियों में तीन महीने तक फूल आते रहते हैं। दोनों प्रजातियों में फलियों के विकास के लिए दो माह का समय आवश्यक है। खुदाई के समय सभी फलियां पूर्ण रूप से पकी नहीं होतीं। फसल की खुदाई फसल की खुदाई ऐसे समय पर ही करें, जब अधिकतर फलियां पक जायें, देर से खुदाई करने पर जिन प्रजातियों में सुषुप्तावस्था नहीं होती वे खेत में नमी मिलने पर पुनः अंकुरण कर सकती हैं। इन प्रजातियों में पौधों से पत्तियां गिर जाती हैं व पौधा सूख जाता है। पौधे पीले पड़ जाएं व अधिकांश पत्तियां गिर जायें तभी फसल की कटाई करनी चाहिए। फसल की पूर्णतः परिपक्वता पर मृदा की प्रजाति, मृदा में नमी की मात्रा, जलवायु व फसल की प्रजाति का प्रभाव पड़ता है। सामान्य परिस्थितियों में अगेती व पछेती प्रजातियां 105 और 135 दिनों में पक जाती हैं। विभिन्न अवस्थाओं में फसल पकने तथा खुदाई की उपयुक्त अवस्था ज्ञात करने के लिए वनस्पति भागों को देखकर जब यह संभावना लगने लगे की फसल पक गयी है तो कुछ दिनों के अंतर पर खेत से कुछ पौधे उखाड़कर समय-समय पर फसल के पकने का निरीक्षण करना चाहिए। कटाई जब प्रति पौधे से अधिक से अधिक मात्रा में पूर्ण विकसित तथा परिपक्व फलियां प्राप्त हों तभी फसल की कटाई करनी चाहिए। फलियों को तब तक सुखाना चाहिए, जब तक इनमें 9-10 प्रतिशत तक नमी रह जाये। बीजों के लिए फलियों को अच्छी प्रकार सुखाना चाहिए तथा बीज को फली में ही रहने देना चाहिए। स्त्राेत : खेती पत्रिका, राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय, एस.एस. राठौर और बिपिन कुमार ’सस्य विज्ञान संभाग एवं जल प्रौद्योगिकी केन्द्र, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-11001